Is Time Travel Possible? Time Dilation, Multiverse, Parallel Universe, James Webb Telescope?

टाइम ट्रैवल करना संभव है वह भी एक या दो वर्ष नहीं बल्कि हजारों वर्ष और ये मेरे नही दुनिया के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के शब्द है।

 नमस्कार मित्रों। हमारी वेबसाइट Brahmand Tak में आपका हार्दिक स्वागत है। मैं हूं Akshita Chaudhary और आप पढ़ रहे हैं Brahmand Tak Blogs। दोस्तों आज में आपको बहुत कुछ नया सिखाने वाली हूं जिसे जानकर आप अंतरिक्ष विज्ञान की तरफ बहुत ज्यादा आकर्षित हो जायेंगे। आज के ब्लॉग में में आपको बताऊंगी Is Time Travel Possible? Time Dilation, Multiverse, Parallel Universe, James Webb Telescope? इन सब टॉपिक्स के बारे में बहुत ही अच्छे से और विस्तार से समझाऊंगी। James Webb First Image,multiverse confirmed, james web clicked image of 13.8 billion years ago, time travel explain, multiverse explain in hindi, theory of special relativity, time dialation explained in hindi, gravity and speed, creation of sun, gravity of blackhole, blackhole kya hai, time machine, creation of blackhole, end of star, creation of star, temperature of space, nasa, jwst, space time, astronomy, astrology, Elbert Einstein, mystery of space 


Is Time Travel Possible


Is Time Travel Possible



दोस्तों टाइम ट्रैवल पर बात करने से पहले मैं आपको एक खुशखबरी देना चाहती हूं कि James Webb Space Telescope ने अंतरिक्ष की कुछ ऐसी HD इमेज भेजी है जो आज से लगभग 1370 करोड़ साल पुरानी है। पिछले साल क्रिसमस पर नासा ने लगभग 74,000 करोड़ की लागत से James Webb Space Telescope को लॉन्च किया था जिसे धरती से 1,600,000 Km दूर लेग्रेंज बिंदु L2 पर स्थापित किया गया। अब आप सोच रहे होंगे की जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने उस समय जब पृथ्वी का कोई अस्तित्व ही नहीं था, तब की इतनी साफ, रंगीन और HD Image कैसे ले ली? कैसे उसने वो अतीत देख लिया जब पृथ्वी बनी भी नही थी? और अगर यह सच है तो क्या हम पृथ्वी पर भी उस समय की तस्वीरे ले सकते है जब पृथ्वी पर डायनासोर थे, जब पृथ्वी पर आदिमानव हुआ करते थे, जब वानर सेना ने रामसेतु बनाया था? क्या हम महाभारत को फिर से होते हुए देख सकते है? आपके इन सभी सवालों का जवाब आपको इस ब्लॉग में मिल जायेगा। अगर आज आप के दिमाग के चक्षु खुल जाए तो इसे अपने दोस्तों और परिजनों के साथ शेयर जरूर करना। 


दोस्तों आप सभी ने कई फिल्मों और उपन्यासों में टाइम ट्रैवल के बारे बहुत बार सुना और पढ़ा होगा। पर दोस्तो आपको क्या लगता है, टाइम ट्रैवल करना कभी पॉसिबल हो सकता है अथवा केवल एक कोरी कल्पना है या फिल्मी दुनिया की बेतुकी बात है। आप में से अधिकतर को यही लगता होगा की टाइम ट्रैवल करना बिलकुल संभव नहीं है पर यह सच नहीं है। टाइम ट्रैवल करना संभव है, जी हां सही पढ़ा आपने टाइम ट्रैवल करना संभव है वह भी एक या दो वर्ष नहीं बल्कि हजारों वर्ष और ये मेरे नही दुनिया के महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन के शब्द है। अलबत्ता साइंस तो यही कहती है कि टाइम ट्रैवल पॉसिबल है इसमें कोई दोराय नहीं है। हां कैसे पॉसिबल है वो आपको थोड़ी देर में समझ आ जायेगा। 

टाइम ट्रैवल का मतलब है समय के किसी एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक की यात्रा करना या साफ शब्दों में कहा जाए तो अपने अतीत या भविष्य की सैर करना।

वर्षो से हम यही मानते आए हैं कि समय हमेशा स्थिर गति से आगे बढ़ता रहता है या यूं कहें कि समय की रफ्तार हमेशा स्थिर रहती है चाहे आप धरती पर हो या आकाश में, सूर्य के पास हो या मंगल गृह पर या फिर ब्लैक होल ही क्यों न हो। मगर अल्बर्ट आइंस्टाइन ने बताया कि समय की रफ्तार स्थिर (constant)  नहीं है। उन्होंने अपने सापेक्षता के विशिष्ट सिद्धांत में Time Dilation के बारे में बताया। उन्होंने बताया की समय, गति और गुरत्वाकर्षण पर निर्भर करता है। अर्थात दो भिन्न भिन्न गति से गतिशील वस्तुओं के लिए टाइम की परिभाषा अलग होगी। माना कोई वस्तु दूसरी वस्तु की अपेक्षा तेज गति से गतिशील है तो उस पहली वस्तु के लिए समय की रफ्तार धीमी हो जायेगी। इस बात को समझाने के लिए एक प्रयोग किया गया था। दो एटॉमिक वॉच ली गई जिनमे से एक को धरती पर रखा गया तथा दूसरी वॉच को एक  बहुत गति से गतिशील विमान में भेजा गया। यहां एटॉमिक वॉच इसलिए इस्तेमाल की गई क्योंकि ये घड़ियां समय की सबसे सटीक गणना करती है। जब विमान से वापस लोटने के बाद दोनों घड़ियों के समय की तुलना की गई तो वैज्ञानिकों ने पाया कि जो घड़ी विमान में थी उसका समय बाहर स्थिर रखी घड़ी से कुछ माइक्रो सेकंड कम था अर्थात् विमान में समय धीमा हो गया था हालांकि यहां ध्यान देने योग्य बात है कि विमान में बैठे यात्रियों के लिए समय धीमा नहीं हुआ था उनके लिए तो समय सही रफ्तार से चल रहा था लेकिन कोई विमान के बाहर स्थिर खड़ा ऑब्जर्वर अगर विमान में रखी घड़ी को देखेगा तो घड़ी थोड़ी मंद गति से चलती नजर आएगी। जबकि विमान में बैठे यात्री तो घड़ी के साथ एक समान गति से गतिशील है इसलिए उनके लिए उस घड़ी का समय सामान्य गति से ही चल रहा होता है। 

आपको ये चीजे बहुत ही ज्यादा कॉम्प्लिकेटेड लग रही होगी तो कन्फ्यूजन से बचने के लिए सबसे पहले आपको आपके दिमाग से वह पुरानी धारणा निकाल देनी चाहिए जिसके अनुसार समय को कांस्टेंट बताया जाता था। आपको अभी कुछ और ऐसे उदाहरण दूंगी जिससे Time Dilation की थ्योरी से संबंधित आपके सारे डाउट खत्म हो जायेंगे।  

Albert Einstein ने बताया कि इस Time Dilation की थ्योरी के इस्तेमाल से फ्यूचर में Time Travel किया जा सकता है वह भी एक नहीं हजारों साल आगे तक।

Time Dilation की गणितीय गणनाओं के आधार पर अगर आप प्रकाश की गति से चलने वाले किसी स्पेसक्राफ्ट में मात्र एक साल बिताते है तो उतने समय में धरती पर 900 साल बीत जायेंगे। यानि जब एक साल बाद आप वापस लौट कर धरती पर आओगे तो धरती पर 900 साल बीत चुके होंगे आपके वंश की 30-40 पीढ़ियां जन्म लेकर मर चुकी होंगी जबकि इस दौरान आपने तो अपने जीवन का मात्र एक साल जिया है। जाहिर है ये सब बाते सुनकर आपका दिमाग चकरा जाएगा पर थियोरेटिकली ये अवधारणा शत प्रतिशत सच है जिसे प्रकाश की तुलना में कम स्पीड वाले विमानों में सत्यापित भी किया जा चुका है। 

अब आपके मन मे ये सवाल जरूर आएगा कि कोई व्यक्ति प्रकाश की गति वाले स्पेसक्राफ्ट में एक साल गुजारता है तो उसी दौरान धरती पर उसकी 30-40 पीढ़ियां जन्म लेकर मर चुकी होंगी, पर आपके इस सवाल का जवाब भी है। दरअसल प्रकाश की गति से यदि कोई स्पेसक्राफ्ट चल रहा है तब उसमे सवार किसी व्यक्ति या घड़ी को कोई बाहर खड़ा ऑब्जर्वर ऑब्जर्व करें तो वह देखेगा कि समय से लेकर उस व्यक्ति की कोशिकाएं तक हर चीज बहुत ज्यादा धीमी हो गई या लगभग रुक सी गई परंतु उस स्पेसक्राफ्ट में बैठे व्यक्ति के लिए समय भी सामान्य है और उसकी शरीर की कोशिकाओं और बाकी अंगो की मूवमेंट भी सामान्य है। साफ साफ शब्दों में कहूं तो उस स्पेसक्राफ्ट में बैठे यक्ति की एजिंग बहुत ज्यादा स्लो हो जाती है जो की टाइम पर डिपेंड करती है। अतः प्रकाश की गति वाले स्पेसक्राफ्ट में एक साल से यात्रा कर रहे व्यक्ति के लिए तो एक साल ही गुजरा है परंतु धरती पर तब तक 800 साल बीत चुके है। क्यों की यहां टाइम भी फास्ट है इसलिए लोगो की एजिंग भी फास्ट है। 

अब सैद्धांतिक रूप से तो ये हो सकता है लेकिन आप कहोगे कि ये तो पॉसिबल ही नहीं है क्यों कि प्रकाश की गति वाले स्पेसक्राफ्ट तो बनाना संभव ही नहीं है। आपकी इस बात से मैं शत प्रतिशत सहमत हूं, साइंस के अनुसार हम प्रकाश की गति से यात्रा नहीं कर सकते पर हम प्रकाश की गति से थोड़ी कम गति से यात्रा कर सकते है। साइंस इस बात को मानता है और ऐसे विमान तैयार किए जा सकते है जो प्रकाश की गति से कम गति से यात्रा कर सकेंगे (इस विषय पर मैं अलग से एक ब्लॉग लिख दूंगी समझाने के लिए) मतलब जितना टाइम ट्रैवल प्रकाश की गति वाले स्पेसक्राफ्ट से कर सकते है उससे कम टाइम ट्रैवल कर पाएंगे। 


दोस्तो ये तो था पहला तरीका जिससे हम स्पीड बढ़ाकर टाइम को धीमा करके फ्यूचर में ट्रैवल कर सकते हैं। एक अन्य तरीका और है जिसकी सहायता से फ्यूचर में टाइम ट्रैवल किया जा सकता है जी हां मैने ऊपर भी कहा था कि Time गति और गुरुत्वाकर्षण पर निर्भर करता है। इसका कांसेप्ट बहुत ही साधारण और सरल है।  जिस गृह या ऑब्जेक्ट का गुरुत्वाकर्षण बहुत ज्यादा होता है उसके आस पास और उस ऑब्जेक्ट पर समय बहुत धीमा हो जाता है। इसका सीधा सीधा मतलब यह हुआ कि हर गृह हर तारे के लिए टाइम की परिभाषा अलग है। और ब्लैकहोल जिनका गुरुत्वाकर्षण और घनत्व बहुत ही ज्यादा होता है वहां टाइम अत्यधिक धीमा हो जाता है। आइंस्टीन ने बताया की समय और स्पेस एक दूसरे से जुड़े हुए है एक दूसरे से अलग नहीं है। अंतरिक्ष में स्पेस-टाइम की चादर बिछी हुई है। किसी पिंड का जितना ज्यादा गुरुत्वाकर्षण या यूं कहें कि जितना ज्यादा मास होता है वो उतना ही ज्यादा नीचे धंस जाता है इस स्पेस टाइम (दिक् काल) में। जिसकी वजह से स्पेस टाइम में बहुत बड़ा curve बन जाता है जिसके कारण इस पिंड के आसपास और इस पिंड पर टाइम बहुत ज्यादा स्लो हो जाता है। अब मान लो की आप ब्लैकहोल के आसपास किसी गृह पर अगर आप एक साल बिताते है तो उतने टाइम में धरती पर 60,000 साल हो जाते है या उस से भी ज्यादा। आप खुद देख लीजिए इतना ज्यादा टाइम डायलेशन जो प्रकाश की स्पीड पर गति करने से भी नहीं हो रहा वो ब्लैकहोल के आस पास रहने से हो सकता है। जब एक साल बाद आप धरती पर लौट कर आयेंगे तो धरती पर 60,000 साल बीत चुके होंगे। 

तो दोस्तों ये दोनो मैथड थे फ्यूचर में टाइम ट्रैवल करने के। अब आप कहेंगे कि क्या भूतकाल में टाइम ट्रैवल किया जा सकता है तो साइंस का जवाब केवल ना होगा। क्योंकि साइंस के अनुसार पास्ट यानि अतीत में टाइम ट्रैवल करना पॉसिबल नहीं है। क्योंकि मान लीजिए हजारों लाखों साल साइंस इतनी तरक्की कर ले की पास्ट में टाइम ट्रैवल करना पॉसिबल हो जायेगा, तो फिर क्यों नहीं कोई फ्यूचर से टाइम ट्रैवल करके नहीं आया हमारे पास। आप खुद सोचिए आप उन लोगो के बीच में कैसे जा सकते है जो मर चुके है सैंकड़ों या हजारों साल पहले जिनकी हड्डियां भी गल चुकी होंगी। ये अलग बात है कि शायद ऐसी कोई पैरलल यूनिवर्स (समानांतर ब्रह्मांड) मिल जाए जहां इस धरती का अतीत चल रहा हो तो वहां हम जा पाए। लेकिन आप अगर वहां जाकर अपने अतीत को बदलना चाहे तो ये बिलकुल पॉसिबल नहीं होगा क्योंकि पैरलल यूनिवर्स की घटनाएं उसी यूनिवर्स के लिए जिम्मेदार होती है, हमारी धरती पर उसका कोई असर नहीं पड़ेगा। 

फॉर एग्जांपल आपके किसी दोस्त की मौत हो जाती है किसी दुर्घटना में। आप चाहते है कि काश में अतीत में जाकर बचा पाऊं उसको। जैसा कि मैंने पहले भी कहा है आप जिस धरती पर जी रहे हो उसके अतीत में नहीं जा सकते और मान लो आप पैरलल यूनिवर्स में चले जाओ जहां धरती का अतीत चल रहा हो और अपने दोस्त को उस दुर्घटना से बचा लेते हो तो आपका दोस्त केवल उस पैरलल यूनिवर्स में ही जिंदा रहेगा जहां आप उसे बचाने गए है। इस धरती पर तो वो मर चुका है ये मानना ही पड़ेगा आपको क्योंकि यही सच है। जो हो गया वो हो गया उस पर आपका कोई जोर नहीं है।

Time Travel In Vedas 

दोस्तों जो ऊपर हमने टाइम ट्रैवल की बात की है वो सब पॉसिबल हुआ आइंस्टीन की Time Dilation Theory की वजह से। लेकिन क्या आइंस्टीन पहले व्यक्ति थे जिन्होंने टाइम डायलेशन के बारे में बताया या सिर्फ उन्होंने पूरा क्रेडिट अपने नाम कर लिया। हां उनका काम काफी ज्यादा सराहनीय है और पूरी मानवता के लिए एक नया वरदान साबित हुआ है और बुद्धिमान लोग सदा ही पूजनीय होते है। लेकिन Time Dilation के बारे में हमारे वेदों में हजारों साल पहले से लिखा है कि ब्रह्म लोक में बिताए एक दिन में धरती पर लाखों साल बीत जाते है। ये बात हमारे उन्ही वेद पुराणों में लिखी है जिन्हे पश्चिमी और खुद इंडिया के लोग माइथोलॉजी बोलते है। यानी झूठी बाते या कल्पना मात्र। और साइंटिस्ट को जो बाते आज पता चल रही है वो हमने हजारों साल पहले दुनिया को बताई लेकिन तब कोई विश्वास ही नहीं करता तब इन्हें माइथोलॉजी बताते है इनका दुष्प्रचार करते है। इसका सबसे ताजा उदाहरण है James Webb Space Telescope द्वारा ली गई 1370 करोड़ साल की फोटो जिसके साथ ही मल्टीवर्स कन्फर्म हो गया। और इस Multiverse के बारे में भी वेदों में लिखा है। यहां तक कि खुद भगवान श्री कृष्ण ने ब्रह्मा जी को Multiverse के बारे में समझाया। हालांकि दुनिया के कुछ महान वैज्ञानिक और बुद्धिजीवी हुए है जिन्होंने वेदों और संस्कृत से मिले ज्ञान और उनकी महानता के  बारे में दुनिया को बताया। इसमें कोई आश्चर्य नहीं कि क्यों जर्मनी के 14 यूनिवर्सिटीज में संस्कृत पढ़ाई जाती है। विमान बनाने से लेकर टाइम ट्रैवल, time Dilation तक ऐसी अनगिनत चीजे है जो हमने हजारों साल पहले बताई और जिसे आज के वैज्ञानिक सत्य सिद्ध कर रहे है। इसके बावजूद जहां तक  आज के विज्ञान का  दायरा है उस दायरे के अंदर ऐसी कोई थ्योरी या बात नहीं होगी जो वेदों में लिखी इन बातों को झूठी साबित कर सके। इस विषय पर में अलग से ब्लॉग लिखूंगी क्यों कि वेदों में अभी भी वो चीजे लिखी है जिनके बारे में सुनकर आपके होश ठिकाने नहीं रहेंगे। जिनके बारे में विज्ञान अभी सोचने से भी कांपता है। 
चलिए इस बात को यही विराम देकर अब बात करते है James Webb Space Telescope द्वारा ली गई इमेजेस के बारे में।


James Webb Space Telescope 


दोस्तों ऊपर शुरू में हमने जो हमने सवाल उठाए थे उनके जवाब मिलने वाले है अब आपको। दरअसल पिछले साल 25 दिसंबर 2021 (क्रिसमस) पर नासा ने लगभग 74,000 करोड़ की लागत से एक महाशक्तिशाली दूरबीन James Webb Space Telescope को लॉन्च किया था जिसे धरती से 1,600,000 Km दूर लेग्रेंज बिंदु L2 पर स्थापित किया गया। जेम्स वेब टेलीस्कोप इन्फ्रारेड किरणों को डिटेक्ट करता है और इस तकनीक की वजह से ब्रह्मांड के दूरस्थ, अनभिज्ञ और अनदेखी चीजों की अति उत्तम क्वालिटी में डिटेल्ड तस्वीरें लेने में सक्षम है। James Webb Space Telescope पृथ्वी की नहीं बल्कि सूर्य की परिक्रमा करेगा। Lagrange point को इसलिए चूज किया है क्योंकि इस बिंदु पर सूर्य और पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में संतुलन बना रहता है। ये पृथ्वी से 1,600,000 कम सूर्य और पृथ्वी से बाहर की और स्थापित किया गया है। इतनी दूर पर स्थापित करने में बहुत जोखिम भी था बावजूद इसके उसे इतनी दूर क्यों स्थापित किया गया इसका कारण आपको नीचे पता चल जायेगा। 

 एक्चुअली James Webb Space Telescope में एक 21 फीट लंबा मिरर लगा है जो गोल्ड प्लेटेड है जिसमे 900 ग्राम गोल्ड लगा है। चूंकि गोल्ड प्लेटेड मिरर सबसे साफ और HD क्वालिटी की इमेज क्रिएट करते है। दोस्तों James webb Space Telescope किसी वस्तु की तस्वीर लेने के लिए infrared technique का इस्तेमाल करता है। यह क्लासिकल ऑप्टिकल टेलीस्कोप से भिन्न है। हर वस्तु या चीज infrared heat उत्सर्जित करती है अपनी बॉडी से चाहे वो सजीव हो या निर्जीव। इसी इन्फ्रारेड हिट को डिटेक्ट करके HD रंगीन तस्वीर ली जा सकती है जो किसी ऑप्टिकल कैमरा या टेलीस्कोप से अच्छी क्वालिटी की होती है। अब इन्फ्रारेड हिट को सेंस करने में सबसे बड़ी दिक्कत ये आती है की ये खुद से निकलने वाली इन्फ्रारेड हिट वेव्स को भी डिटेक्ट करेगा जो इसकी कार्यप्रणाली में  इंटरफेयर करेगी और हमें अच्छे रिजल्ट्स नहीं मिल पाएंगे और हाई रिजॉल्यूशन की इमेज नही मिल पाएगी। इस दुविधा से बचने के लिए यह जरूरी है की इस टेलीस्कोप को -223° C  तापमान पर रखा जाए जो की धरती पर तो किसी हाल में पॉसिबल नहीं है। यह चीज केवल अंतरिक्ष में ही पॉसिबल है। वहां भी सूर्य की एक किरण भी इस पर नही गिरनी चाहिए। अगर गिरती है तो इसका टेंपरेचर बढ़ेगा और वो रिजल्ट्स जो हमें चाहिए वो नही मिल पाएंगे। वैज्ञानिकों के सामने नई समस्या आ गई की इसे पृथ्वी की कक्षा में भी स्थापित नहीं किया जा सकता क्यों कि पृथ्वी कि कक्षा में सूर्य की रोशनी से बचना असंभव है। इसलिए डिसाइड किया गया कि इसे सूर्य और पृथ्वी की लेग्रांज बिंदु L2 पर स्थापित किया जाएगा जहा इसे हमेशा पृथ्वी की आड़ में रखा जाएगा सूर्य की तेज रोशनी से बचाने के लिए। अतः ये भी सूर्य की परिक्रमा एक साल में ही पूरी कर लेगा। इसे हर 21 दिनों में थ्रस्ट देकर एक्सीलरेट किया जाएगा ताकि हमेशा पृथ्वी की आड़ में रहे। अब पृथ्वी से आने वाली प्रकाश किरणों और अवरक्त किरणों से बचाने के लिए भी James Webb Space Telescope (JWST) पर एक 5 लेयर वाली kapton शील्ड बनाई गई है। 


How To See Past By JWST

दोस्तों जैसा कि मैंने ऊपर कहा कि James Webb Space Telescope ने अंतरिक्ष की कुछ ऐसी HD इमेज भेजी है जो आज से लगभग 1370 करोड़ साल पुरानी है।अब आप सोच रहे होंगे की जेम्स वेब स्पेस टेलीस्कोप ने उस समय जब पृथ्वी का कोई अस्तित्व ही नहीं था, तब की इतनी साफ, रंगीन और HD Image कैसे ले ली? कैसे उसने वो अतीत देख लिया जब पृथ्वी बनी भी नही थी? और अगर यह सच है तो क्या हम पृथ्वी पर भी उस समय की तस्वीरे ले सकते है जब पृथ्वी पर डायनासोर थे, जब पृथ्वी पर आदिमानव हुआ करते थे, जब वानर सेना ने रामसेतु बनाया था? क्या हम महाभारत को फिर से होते हुए देख सकते है?
दोस्तों इसका सिंपल सा लॉजिक है जो आपको एक मिनट में समझ आ जायेगा। दोस्तो अंतरिक्ष में यदि प्रकाश को किसी दूरी तक ट्रैवल करने में एक वर्ष लग जाए तो उस दूरी को एक प्रकाश वर्ष कहा जाता है। यानी अंतरिक्ष में कोई तारा हमसे 1000 प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित है तो इसका मतलब ये है कि उस तारे की रोशनी को हम तक पहुंचने में 1000 वर्ष लग जायेंगे। यानि की अभी हम उस तारे को देख पा रहे है वो आज की नहीं बल्कि 1000 वर्ष पहले की रोशनी है जो हम तक आज पहुंची है। हम उसकी वो ही शेप दिखाई देगी जो हजार वर्ष पहले की थी। इसे एक अन्य एग्जांपल से आसानी से समझा जा सकता है -

आप सब जानते है कि सूरज की लाइट को धरती पर आने में करीब 8 मिनट का समय लगता है या यूं कहें कि सूरज हमसे 8 प्रकाश मिनट की दूरी पर स्थित है। अब जो सूर्य की किरण हम तक पहुंच रही है वो एक्जेक्ट उसी क्षण की न होकर के 8 मिनट पहले की होती है। यानी जो छवि हमें सूरज की दिखाई देती है वो 8 मिनट पहले की है। अब यदि सूरज पर अचानक से ग्रहण लग जाए या सूरज अस्त हो जाए तो भी हमें उसके 8 मिनट बाद तक सूरज दिखता रहेगा क्यों की जो लाइट्स आ रही है सूरज से वो 8 मिनट पहले की है। 

तो जो तस्वीर JWST ने ली है वो 1370 करोड़ प्रकाश वर्ष दूर की है यानि वहां से उत्सर्जित प्रकाश और अवरक्त (इंफ्रारेड) किरणों को हम तक पहुंचने में 1370 करोड़ साल लग गए। ये ब्रह्मांड के शुरुआती दौर की पिक्चर है। लेकिन हम इस टेलीस्कोप के जरिए पृथ्वी का अतीत नहीं देख सकते क्यों कि पृथ्वी और टेलीस्कोप के बीच में इतनी दूरी नहीं है की हजारों लाखों साल पहले की रोशनी को डिटेक्ट कर सके। क्यों कि पृथ्वी से ये मात्र 3 प्रकाश सेकंड की दूरी पर स्थित है। अगर हजार साल पहले का इतिहास देखना है तब हमें पृथ्वी से हजार प्रकाश वर्ष की दूरी पर टेलीस्कोप को भेजना होगा जो कि लगभग असम्भव है और वहां तक जाने में ही इतना समय लग जायेगा की पृथ्वी पर हजारों साल और बीत चुके होंगे। कुल मिलाकर इस टेलीस्कोप से पृथ्वी का अतीत तो देखना मुश्किल है लेकिन दूसरे ग्रहों पर अगर कहीं जीवन है तो उनका अतीत जरूर देख पाएंगे। 



दोस्तों अगर आज के इस ब्लॉग  से आपको कुछ नया सीखने को मिला हो तो इसे अपने दोस्तों और परिजनों के साथ शेयर जरूर करे ताकि उन्हें भी ऐसी जानकारी पता चल सके और जिन स्टूडेंट्स के डाउट है इन टॉपिक्स में उनके डाउट दूर हो सके। आप अगर मुझे इंस्टाग्राम पर बात करना चाहते है तो मेरी Insta Id  Akshita Chauthary (click here to msg) पर  डायरेक्ट मैसेज कर सकते है। जय हिंद जय भारत। Is Time Travel Possible? Time Dilation, Multiverse, Parallel Universe, James Webb Telescope? James Webb First Image,multiverse confirmed, james web clicked image of 13.8 billion years ago, time travel explain, multiverse explain in hindi, theory of special relativity, time dialation explained in hindi, gravity and speed, creation of sun, gravity of blackhole, blackhole kya hai, time machine, creation of blackhole, end of star, creation of star, temperature of space,nasa, jwst, space time, astronomy, astrology, Elbert Einstein, mystery of space




1 comment

  1. Nicw work 👍🏻🙂
© Brahmand Tak. All rights reserved. Developed by Jago Desain