Mahashivratri 2022

महादेव अपने भक्तो में भेदभाव नही करते वो सुर हो या असुर सबको एक ही दृष्टि से देखते है, और मात्र एक लौटा जल चढ़ाने से भी प्रसन्न हो जाते हैं....

 नमस्कार मित्रों। आपकी अपनी वेबसाइट Brahmand Tak में आपका हार्दिक स्वागत है। मैं हूं Akshita Chaudhary और आप पढ़ रहे हैं Brahmand Tak Blogs। आप सभी को Mahashivratri 2022 की हार्दिक शुभकामनाएं। मृत्यु और काल के देवता, काशिकापुराधिनाथ शशिशेखर एवं जटा धारण करने वाले विरुपाक्ष भगवान भोलेनाथ को मेरा दंडवत  प्रणाम। आज Mahashivratri के महा उपलक्ष्य पर मैं आपको महाशिवरात्रि और भगवान शिव से जुड़ी कुछ अहम बाते बताऊंगी। Mahakal Image, Mahadev Pic, Mahashivratri Pics, Shivratri, Mahashivratri Fast, Brahmand Ke Nath, Bholenath, Brahmand Tak, Lord Shiva, Shankara, Kedarnath, Rameshwaram, Triyambakeshwar, vishwanath, Kashi, Ujjain, Mahamrityunjay, Tandav Stotram, Shiv Purana, Aadi Yogi, Mahashivratri Pujan Vidhi, Pujan Samagri, Shiv Aarti


महाशिवरात्रि 2022

Mahadev


इस वर्ष महाशिवरात्रि की तिथि 01 मार्च, मंगलवार सुबह 3:16 बजे से शुरू होकर 02 मार्च, बुधवार सुबह 10 बजे तक रहेगी।

महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन महादेव और माता पार्वती को विवाह हुआ था। एक और मान्यता है की महाशिवरात्रि की रात भगवान शिव करोड़ों सूर्य के समान तेज वाले ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे। वैसे प्रत्येक वर्ष में 12 शिवरात्रि आती है मगर साल में मुख्य रूप से 2 ही शिवरात्रि मनाई जाती है एक फाल्गुन मास में और दूसरी श्रावण मास में। फाल्गुन मास की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में मनाया जाता है। 


महादेव की पूजा कैसे करें Mahashivratri Pujan Vidhi

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव की पूजा रात्रि में ही करना ज्यादा शुभ है परंतु आप दिन में भी कर सकते है। इस दिन तांबे के लौटे में स्वच्छ जल, मिश्री एवं कच्चा दूध डालकर शिवलिंग पर चढ़ाएं इसके पश्चात शिवलिंग पर बेलपत्र, आंकड़े के फूल एवं चांवल चढ़ाएं। मगर ध्यान रहे कि बेलपत्र का चिकना भाग अंदर की तरफ यानी शिवलिंग की तरफ रहे और दूसरा हिस्सा बाहर की तरफ रहें। शिवलिंग पर कभी भी सिंदूर ना लगाए क्योंकि शिवलिंग पुरुष प्रतीक है और शिवलिंग पर नहीं लगाया जाता इसकी बजाया आप शिवलिंग पर चंदन का टीका लगा सकते हैं। भगवान शिव पर जल या दुग्ध चढ़ाते समय ॐ नमः शिवाय अथवा महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।

वैसे तो मेरे भोलेनाथ बहुत भोले है, एक लोटा जल भी सच्चे मन से चढ़ाने से प्रसन्न हो जाते हैं। भोलेनाथ भाव के भूखे है उन्हे मनाने के लिए पूरे विधि विधान से पूजा करने की आवश्यकता नहीं होती और वे जल्दी प्रसन्न भी हो जाते हैं इसीलिए आपने देखा होगा की प्राचीनकाल में लगभग सभी असुर भगवान शिव की ही आराधना करते थे, क्योंकि महादेव जल्दी प्रसन्न हो जाते है। और वो अपने भक्तो में भेदभाव नही करते वो सुर हो या असुर सबको एक ही दृष्टि से देखते है इसी बात का फायदा असुर उठाते और उन्हें प्रसन्न कर के कोई भी वर मांग लेते थे। भोलेनाथ को प्रसन्न करना, भगवान विष्णु को प्रसन्न करने से आसान हैं, क्योंकि भोलेनाथ आपकी मंशा नहीं देखते वे भौतिक इच्छाएं पूरी करने वाले वरदान भी दे देते है जबकि श्रीहरि आपका मन देखते है और भक्ति भाव देखते है वे कभी भौतिक इच्छा रखने वालो को वरदान नहीं देते। श्रीहरि हमेशा असुरों का वध करने के लिए अवतार लेते है इसीलिए सारे असुर इन्हें अपना शत्रु भी मानते है।


पूजा का मुहूर्त Puja Ka Muhurt

रात्रि प्रथम प्रहर पूजा समय: 06:27 PM से 09:29 PM तक

रात्रि द्वितीय प्रहर पूजा समय:  09:29 PM से 12:31 AM तक

रात्रि तृतीय प्रहर पूजा समय: 12:31 AM से 03:32 AM तक

रात्रि चतुर्थ प्रहर पूजा समय: 03:32 AM से 06:34 AM तक


महाशिवरात्रि व्रत कैसे करें Mahashivratri Vrat Kese kare

भारतीय संस्कृति में उपवास/व्रत का विशेष महत्त्व है। आम तौर पर उपवास भगवान को खुश करने के लिए किए जाते है मगर आपके शरीर और मन मस्तिष्क के लिए भी ये बहुत फायदेमंद है। ये बात वैज्ञानिक रूप से सिद्ध है। अतः शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपवास करना आवश्यक है। उपवास विषय निवृत्ति का अचूक साधन है। 

ऐसे करें महाशिवरात्रि का उपवास 
  • महाशिवरात्रि के दौरान पूरे समय निराहार रहकर यह व्रत किया जाता है, अशक्त एवं वृद्धजन फलाहार ले सकते है।
  • शाम को स्नानादि करके रात्रि के चारों पहर की पूजा में से किसी एक पहर में अथवा चारों पहर में पूजा करें।
  • व्रत के दौरान दिन भर भगवान शिव का स्मरण करें एवं पंचाक्षर मंत्र ( ॐ नमः शिवाय ) का जाप करें।
  • माथे पर त्रिपुंड लगाए एवं गले में रुद्राक्ष की माला धारण करें।
  • चतुर्दशी तिथि के अस्त होने से पहले अथवा अस्त होने के बाद स्नानादि करके व्रत का पारण कर सकते हैं
  • मान्यता हैं की महाशिवरात्रि का व्रत रखने से अच्छा एवं मनचाहा जीवनसाथी मिलता है साथ ही वैवाहिक जीवन में सुख शांति आती है।

शिवलिंग पर तुलसी ना चढ़ाएं

भगवान शिव एवं शिवलिंग पर तुलसी नही चढ़ाई जाती। शिवलिंग पुराण के अनुसार एक जालंधर नाम का राक्षस था जिसे वरदान मिला हुआ था कि जब तक उसकी पत्नी पवित्र रहेगी तब तक उसे कोई नही मार सकता। तब भगवान विष्णु को तुलसी की पवित्रता भंग करनी पड़ी और भगवान शिव ने जालंधर का वध कर दिया। अपने पति के वध से तुलसी ने  भगवान शिव का बहिष्कार कर दिया था। यही कारण है कि शिवलिंग पर तुलसी नहीं चढ़ाई जाती। 

भगवान शिव की आरती Bhagwan Shiv Ki Aarti

🙏 शिवजी की आरती 🙏

ॐ जय शिव ओंकारा,स्वामी जय शिव ओंकारा।

ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव,अर्द्धांगी धारा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

एकानन चतुराननपञ्चानन राजे।

हंसासन गरूड़ासनवृषवाहन साजे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

दो भुज चार चतुर्भुजदसभुज अति सोहे।

त्रिगुण रूप निरखतेत्रिभुवन जन मोहे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

अक्षमाला वनमालामुण्डमाला धारी।

त्रिपुरारी कंसारीकर माला धारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

श्वेताम्बर पीताम्बरबाघम्बर अंगे।

सनकादिक गरुणादिकभूतादिक संगे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

कर के मध्य कमण्डलुचक्र त्रिशूलधारी।

सुखकारी दुखहारीजगपालन कारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

ब्रह्मा विष्णु सदाशिवजानत अविवेका।

मधु-कैटभ दो‌उ मारे,सुर भयहीन करे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

लक्ष्मी व सावित्रीपार्वती संगा।

पार्वती अर्द्धांगी,शिवलहरी गंगा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

पर्वत सोहैं पार्वती,शंकर कैलासा।

भांग धतूर का भोजन,भस्मी में वासा॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

जटा में गंग बहत है,गल मुण्डन माला।

शेष नाग लिपटावत,ओढ़त मृगछाला॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

काशी में विराजे विश्वनाथ,नन्दी ब्रह्मचारी।

नित उठ दर्शन पावत,महिमा अति भारी॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

त्रिगुणस्वामी जी की आरतिजो कोइ नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी,मनवान्छित फल पावे॥

ॐ जय शिव ओंकारा॥

भगवान शिव के 12 नाम Bhagwan Shiv Ke 12 Name

महाशिवरात्रि के दिन भगवान शिव के 12 नामों का जाप करना चाहिए। भगवान भोलेनाथ के इन 12 नामों का नित्य स्मरण करने से भगवान शिव अनेकों दोषों का शमन करते है। महादेव के इन 12 नामों को श्री शिव द्वादश नामावली के नाम से भी जाना जाता है। ये 12 नाम निम्न प्रकार है - 

  1. सोमनाथ 
  2. मल्लिकार्जुन
  3. महाकालेश्वर
  4. ओंकारेश्वर
  5. वैद्यनाथ
  6. भीमाशंकर
  7. रामेश्वर
  8. नागेश्वर
  9. विश्वनाथ
  10. त्रियंबकेश्वर
  11. केदारनाथ
  12. घृष्णेश्वर
यह जानकारी सभी शिवभक्तों के साथ शेयर अवश्य करें। 🙏जय महाकाल ❤️ जय माँ पार्वती 🙏


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